प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासाउंड क्यों किया जाता है Pregnancy ke dauran ultrasound kyon kiya jata hai

प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासाउंड क्यों किया जाता है

आइये जाने अल्ट्रासाउंड क्या होता है
अल्ट्रासाउंड में उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगो को पेट के द्वारा गर्भाशय में भेजा जाता है ये तरंगे बेबी को टच करके वापिस आती हैं और कम्प्यूटर इन तरंगों को चलचित्र में बदल देता है इसके द्वारा शिशु की हलचल और स्थिति का पता लगाया जा सकता है

ultrasound in pregnancy
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अल्ट्रासाउंड करने करने कारण

1.अल्ट्रासाउंड से जान सकते है गर्भ में एक या एक ज्यादा शिशु पल रहे है
2. इससे अस्थानिक गर्भावस्था का पता चल जाता है अस्थानिक गर्भावस्था का अर्थ है शिशु गर्भ से बाहर फैलोपियन ट्यूब में विकसित होने लगता है इस अवस्था में दर्द और रक्तस्त्राव बहुत अधिक होता है ऐसी गर्भावस्था के बचने के चांस बहुत कम होते है
3. इससे गर्भावस्था की सही अवधि का पता लगाया जा सकता है
4. 11 से 14 सप्ताह के बीच किये जाने वाले अल्ट्रासाउंड से शिशु की गर्दन के पीछे तरल पदार्थ को माप कर डाउंस सिंड्रोम के खतरे का पता लगाया जा सकता है ताकि उन उचित इलाज किया जा सके ज्यादातर डाउंस सिंड्रोम शिशु जन्म से मानसिक रूप से कमजोर होते है
5. इससे शिशु और अपरा की स्थिति का पता लगाया जा सकता है ताकि जान सके कि शिशु का जन्म नार्मन डिलीवरी से होगा या फिर सिजेरियन डिलीवरी से
6. इससे पता लगाया जा सकता है कि शिशु का विकास सामान्य गति से हो रहा है नहीं और हर बार जाँच में
7. इससे एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा  का पता लगाया जा सकता है
8. इससे शिशु में किसी विशेष दोष या विकृति का पता लगाया जा सकता है जैसे स्पाइना बिफिडा , स्पाइना बिफिडा का अर्थ गर्भ में पल रहे शिशु की रीढ़ की हड्डी का विकास सही तरीके से नहीं हो पाना इस प्रकार के शिशु में जन्म से किसी न किसी प्रकार की शारीरिक विकृति होती है
9. यदि आपको गर्भावस्था के दौरान अनियमित रक्तस्त्राव हो रहा है तो अल्ट्रासाउंड से इसके कारण का पता लगाया जा सकता है
10. अल्ट्रासाउंड से शिशु और अपरा के बीच रक्त संचार का पता लगाया जा सकता है
इनके आलावा गर्भावस्था में किसी भी प्रकार की प्रॉब्लम है तो उसका पता लगाने के लिए भी अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है

Pregnancy ke dauran ultrasound kyon kiya jata hai

aaiye jane ultrasound Kya Hota hai
ultrasound me uchch aavrtti vali dhonei tColoro ko Pet ke Dwara garbhashay me bheja jata hai ye tColore bebi ko Touch karke vapis aati hain aur kampYoutar in tColoron ko chalchitr me bdal deta hai Iske Dwara shishu ki halchal aur sthiti Ka pata lagaya ja skata hai

ultrasound karne karne Karan

1.ultrasound se jan sakte hai garbh me ek ya ek Jyada shishu pal rahe hai
2. Isse asthanik garbhavastha Ka pata chal jata hai asthanik garbhavastha Ka arth hai shishu garbh se bahar fallopian tube me vikasit hone lgata hai is avastha me dard aur raktastrav bahut adhik Hota hai aesi garbhavastha ke bchane ke chans bahut kam hote hai
3. Isse garbhavastha ki sahi avadhi Ka pata lagaya ja skata hai
4. 11 se 14 saptah ke bich kiye jane vale ultrasound se shishu ki gardan ke pichhe tarl padarth ko map kar down syndrome ke khatre Ka pata lagaya ja skata hai taki un uchit ilaj kiya ja sake Jyadatar daauns sindrom shishu janm se manasik rup se kamjor hote hai
5. Isse shishu aur upra ki sthiti Ka pata lagaya ja skata hai taki jan sake ki shishu Ka janm normal delivery se Hoga ya Phir Caesarean delivery se
6. Isse pata lagaya ja skata hai ki shishu Ka viKas samany gati se ho raha hai nahin aur har bar janch me
7. Isse amniotic fluid ki matra Ka pata lagaya ja skata hai
8. Isse shishu me kisi vishesh dosha ya vikrti Ka pata lagaya ja skata hai jaise spina bifida , spina bifida Ka arth garbh me pal rahe shishu ki ridh ki hadD Ka viKas sahi tarike se nahin ho paana is prKar ke shishu me janm se kisi n kisi prKar ki sharirik vikrti hoti hai
9. Yadi Aapko garbhavastha ke dauran aniyamit raktastrav ho raha hai to ultrasound se Iske Karan Ka pata lagaya ja skata hai
10. ultrasound se shishu aur upra ke bich rakt snchar Ka pata lagaya ja skata hai
inake aalava garbhavastha me kisi bhi prkar ki Problem hai to usKa pata lagane ke lea bhi ultrasound kiya ja skata hai

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