सीजेरियन डिलीवरी की जरुरत क्यों पड़ती है? cesaren delivery ki jarurat kyon padti hai?

सिजेरियन डिलीवरी की जरुरत क्यों पड़ती  है?

सिजेरियन क्या होती  है?
सिजेरियन डिलीवरी के दौरान डॉक्टर पेट और गर्भाशय पर चीरा लगाती हैं, ताकि शिशु का जन्म हो सके इसे सी-सेक्शन डिलीवरी या ऑपरेशन डिलीवरी भी कहते है

cesaren delivery
cesaren delivery

सिजेरियन डिलीवरी भी दो तरह की होती है

1.  पूर्व नियोजित सिजेरियन डिलीवरी – सीजेरियन डिलीवरी करवाने या करने प्लान पहले निर्धारित हो तो इसे पूर्व नियोजित सिजेरियन डिलीवरी कहते है गर्भावस्था में complication होने की वजह से डॉक्टर पहले से सिजेरियन डिलीवरी करने का निर्णय लेलेता है यह डिलीवरी गर्भावस्था का समय पूरा होने के बाद परन्तु प्रसव पीड़ा शुरू होने से पहले की जाती है
2.  आपातकालीन सिजेरियनडिलीवरी – डिलीवरी के समय शिशु और माँ की सेहत को खतरा हो इस स्थिति डॉक्टर तत्काल सिजेरियन डिलीवरी करने का  निर्णय ले तो इसे आपातकालीन सिजेरियन डिलीवरी कहते है

पूर्व नियोजित सिजेरियन डिलीवरी करवाने के कारण –

1. गर्भावस्था के आखरी चरण में शिशु का ब्रीच पोजीशन में होना या फिर ट्रांसवर्स पोजीशन  (तिरछी) में होना है। या फिर भ्रूण में कोई बीमारी या असामान्यता है
2. प्लेसेंटा प्रिविया की समस्या है। इस कंडीशन में प्लेसेंटा (अपरा) गर्भाशय को आधा या पूरा ढक लेटी है, जिससे के शिशु के बाहर आने का रास्ता बंद हो जाता है और शिशु का जन्म नार्मल डिलीवरी नहीं हो पाता है इसकी जानकारी पहले से ही अल्ट्रासाउंड में पता चल जाती है इस अवस्था में डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी करने का निर्णय लेती है वरना शिशु और माँ दोनों की जान को खतरा हो सकता है
3. यदि आपको प्री-एक्लेमप्सिया है और आपकी की स्थिति लगातार बिगड़ रही है तो प्रसव में देरी करना माँ और शिशु के लिए खतरा हो सकता है ऐसी स्थिति के गर्भावस्था के आखरी चरण में गर्भावस्था की डेट complite होने पहले प्रसव पीड़ा को कृत्रिम से प्रेरित किया जाता है और नार्मल प्रसव करवाने की कोशिश की जाती है परन्तु यदि प्रसव नार्मल तरीके से नहीं हो पाता है तो सिजेरियन डिलीवरी की जाती है प्री-एक्लेमप्सिया तब होता है जब प्लेसेंटा (अपरा)सही तरीके से काम नहीं करती है इसके लक्षण हाई ब्लड प्रेशर ,चेहरें ,हाथ-पैरो में सुजन और अत्यधिक वजन बढ़ जाना
4. यदि आपके पहले से एक से ज्यादा सिजेरियन ऑपरेशन हो चुके है या फिर आपके गर्भाशय की सर्जरी हो चुकी है तो ऐसी स्थिति में भी डॉक्टर पहले से सिजेरियन डिलीवरी करने का निर्णय ले लेता है
5. कुछ महिलाएं प्रसव पीड़ा के भय से पहले ही अपनी इच्छानुसार  डिलीवरी करवाने का निर्णय लेटी है
6. कुछ परिवार ज्योतिष को बहुत अधिक मानते है इसलिए ज्योतिषीय कारणों की वजह से शिशु का जन्म किसी मांगलिक दिन करवाना चाहते ऐसी स्थिति में भी डॉक्टर ऐच्छिक सिजेरियन कर सकती हैं

आपातकालीन सिजेरियन डिलीवरी करवाने के कारण

1. प्रसव के समय शिशु की धड़कन अनियमित हो जाना
2. प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद अचानक दर्द आना बंद हो जाना
3. अपरा का गर्भाशय से अलग हो जाना
4. प्रसव होने से पहले अत्यधिक blooding हो जाना
5. शिशु की स्थिति ठीक न होना और शिशु ज्यादा बड़ा होना

cesaren delivery ki jarurat kyon padti hai?

cesaren Kya hoti hai?
cesaren delivery ke dauran doctor Pet aur garbhashay par chira lagati hain, taki shishu Ka janm ho sake ise si-sekshan delivery ya oPareshn delivery bhi kahte hai

cesaren delivery bhi do tarh ki hoti hai

1. purv niyojit cesaren delivery – sijeriyan delivery karvane ya karne plan Pehle nirdharit ho to ise purv niyojit cesaren delivery kahte hai garbhavastha me complication hone ki vjah se doctor Pehle se cesaren delivery karne Ka nirnay leleta hai Yah delivery garbhavastha Ka Samay pura hone ke bad parntu prasv pida shuru hone se Pehle ki jati hai
2. aapaatKalin cesarendelivery – delivery ke Samay shishu aur man ki sehat ko khatra ho is sthiti doctor tadKal cesaren delivery karne Ka nirnay le to ise aapaatKalin cesaren delivery kahte hai

purv niyojit cesaren delivery karvane ke Karan –

1. garbhavastha ke aakhari charn me shishu Ka brich pojishan me Hona ya Phir taransvars pojishan (tirachhhi) me Hona hai. ya Phir bhrun me koi bimari ya asamanyata hai
2. placenta priviya ki Problem hai. is knDshan me placenta (upra) garbhashay ko aadha ya pura dhak leti hai, Jisse ke shishu ke bahar aane Ka rasta Band ho jata hai aur shishu Ka janm normal delivery nahin ho paata hai isaki janKari Pehle se hi ultrasound me pata chal jati hai is avastha me doctor cesaren delivery karne Ka nirnay leti hai vrana shishu aur man dono ki jan ko khatra ho skata hai
3. Yadi Aapko pri-eklemapsiya hai aur Aapki ki sthiti lagatar bigad rahi hai to prasv me deri Karna man aur shishu ke lea khatra ho skata hai aesi sthiti ke garbhavastha ke aakhari charn me garbhavastha ki date complite hone Pehle prasv pida ko Kritrim se prerit kiya jata hai aur normal prasv karvane ki Try ki jati hai parntu Yadi prasv normal tarike se nahin ho paata hai to cesaren delivery ki jati hai pri-eklemapsiya tab Hota hai jab placenta (upra)sahi tarike se Kam nahin karti hai Iske lakshan high blood pressure ,Facen ,hath-pairo me sujan aur atyadhik wajan (Weight) bdh jana
4. Yadi Aapke Pehle se ek se Jyada cesaren oPareshn ho chuke hai ya Phir Aapke garbhashay ki Sirjari ho chuki hai to aesi sthiti me bhi doctor Pehle se cesaren delivery karne Ka nirnay le leta hai
5. kuch mahilaen prasv pida ke bhay se Pehle hi Apni ichchhanusar delivery karvane Ka nirnay leti hai
6. kuch Family jyotisha ko bahut adhik manate hai islea jyotishaiy Karanon ki vjah se shishu Ka janm kisi Maagalik din karvana chahate aesi sthiti me bhi doctor aechchhik cesaren kar Sakti hain

aapaatKalin cesaren delivery karvane ke Karan

1. prasv ke Samay shishu ki dhadkan aniyamit ho jana
2. prasv pida shuru hone ke bad achanak dard aana Band ho jana
3. upra Ka garbhashay se alag ho jana
4. prasv hone se Pehle atyadhik blooding ho jana
5. shishu ki sthiti thik n Hona aur shishu Jyada bada Hona
 

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